Saturday, May 9, 2009

ओह मम्मी मुजे माफ़ कर देना..

एक बार तुम रो रही थी...
क्योकि मैंने तुम्हें जोर से कुछ कह दिया था..
पर तुम तो अपना अपना काम करते करते चुपचाप रो रही थी...
मुजे पता भी चलने नहीं दिया था...
और अचानक मै आई वहा पानी पिने..
तो देखा तो तुम्हारी आखों से अश्रु बहे जा रहे थे..
मैंने पूछा मम्मी क्यों रो रही हों??
तो तुमने कहा , नीता अगर मेरा बच्चा मुजे जोर से कुछ कहेगा तो कैसे सहु ??
मुजे बहोत दुःख हुवा की मैंने मम्मी को रुलाया..
मै उसके गले लग गई और कहा अरे मुजे डाट दिया होता..
तो मम्मी ने सिर पे हाथ घुमाते हुवे कहा.. मै जोर से तुम्हें कुछ कहेती तो क्या तुम्हें दुःख नहीं होता..
ओह मम्मी मुजे माफ़ कर देना..
मै आज भी वो दिन याद करके रो पड़ती हु...

नीता कोटेचा..

7 comments:

रश्मि प्रभा... said...

maa to mamta kaa duja roop hoti hai,jahan aaj tum ho aur maa...
माँ तो बस जादुई चिराग रखती है......जादू से प्यार,जादू से सपने,जादू से हकीकत....माँ सब कर सकती है!maaf bhi kar deti hai

pawan arora said...

maa maa ek majbuti ek ehssas maashabdo ki mohtaaj nahi maa shabd mohtaaz maa aapke ...bahut badiya likha aapne maa hai aap ehssas aapka bahut sacha achha hai aapko salaam ....salaam parnaam maa jag janni ko bhi

pawan arora said...

maa maa ek majbuti ek ehssas maashabdo ki mohtaaj nahi maa shabd mohtaaz maa aapke ...bahut badiya likha aapne maa hai aap ehssas aapka bahut sacha achha hai aapko salaam ....salaam parnaam maa jag janni ko bhi

nivia said...

Meri maa ne kaha tha jab tum MAA banogi to muzhe samjogi ...................n MAA NE SACH HI KAHA THA ............

nivia said...

माँ तुम……
बहुत याद आ रही हो
एक बात बताऊँ………
आजकल…..
तुम मुझमें समाती जा रही हो


आइने में अक्सर
तुम्हारा अक्स उभर आता है
और कानों में अतीत की
हर एक बात दोहराता है

तुम मुझमें हो या मैं तुममें
समझ नहीं पाती हूँ
पर स्वयं को आज
तुम्हारे स्थान पर खड़ा पाती हूँ

तुम्हारी जिस-जिस बात पर
घन्टों हँसा करती थी
कभी नाराज़ होती थी
झगड़ा भी किया करती थी

वही सब……
अब स्वयं करने लगी हूँ
अन्तर केवल इतना है कि
तब वक्ता थी और आज
श्रोता बन गई हूँ

हर पल हमारी राह देखती
तुम्हारी आँखें ……..
आज मेरी आँखों मे बदल गई हैं
तुम्हारे दर्द को
आज समझ पाती हूँ
जब तुम्हारी ही तरह
स्वयं को उपेक्षित सा पाती हूँ


मन करता है मेरा…
फिर से अतीत को लौटाऊँ
तुम्हारे पास आकर
तुमको खूब लाड़ लड़ाऊँ
आज तुम बेटी
और मैं माँ बन जाऊँ


तुम्हारी हर पीड़ा, हर टीस पर
मरहम मैं बन जाउँ
तुम कितनी अच्छी हो
कितनी प्यारी हो
ये सारी दुनिया को बताऊँ

शोभना चौरे said...

bhut sundar shj bhavnaye
pyrisi.

Jibon Das said...



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