Saturday, October 13, 2007

ख़्वाब


आज अचानक ख्वाब ,
मे आये हुवे थे तुम .
नजरो क सामने ही ,
बैठे हुवे थे तुम .
क्या हुवा जो अचानक ,
छु लिया तुम्हें ।
आख खुल गई हमारी ,
क्यों नाराज हुवे थे तुम।


नीता कोटेचा