Sunday, December 16, 2007

कोई अपना बनता नही ,
अपना बनाने से।
कोई हमे चाहता नही,
हमारे चाहेने से।
दिल थोडा सोचना
बंध कर अब।
कोई दीवाना बनता नही,
तुम्हारे दीवाने बनने से
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हम चाहेंगे ही नही तुम्हें दिल से निकालना
क्योकि याद करके तुम्हें भूल नही सकते।
और
भूलने कि कोशिश ने ही,
तुम्हारी याद बहोत दिला दी

नीता कोटेचा