Saturday, March 7, 2009

कितना अजीब लगता है मुझे तो ये शब्द ही महिला दिवस..
साल में एक दिन मनाओ और उसमे भी सभी महिलाए खुश..
जैसे उनमे तो अक्कल ही नहीं है न...
आज भी उनको सुनना पड़ता है की कमाने की लालच में तुमने अपना स्त्रीत्व गुमा दिया है ..
पहेले से प्रथा चली आती थी की पुरुष घर के बहार जा कर कमाता था और नारी घर को संभालती थी..
पहेले जब कोई रिश्ता आता तो पहेले पूछा जाता था की आपके दादा कौन थे ..आपके मामा कौन है...अभी तो शादी के लिए रिश्ते आते है तो पूछा जाता है की आपकी बेटी कौन सी कंपनी में काम करती है कितना पगार है ..
ये है सुधरा हुवा समाज ..
अरे क्यों मनाते है ये दिन..
जब की आज भी भाई के ..या पापा के या फिर पति के मुड के ऊपर स्त्री ओ का दिन अच्छा जायेगा या बुरा जायेगा ये तय होता है...
जैसे नारी पहेले gulaam थी उतनी ही आज भी है..
आज भी टीवी में बालिका बधू और लाडो जैसी सीरियल दिखाते है मतलब की कही ऐसा हो रहा है वो सही है..और वो ही सोच के बुरा लगता hai ..
एक बेटी जब २१ सल् की होती है तो आज भी सब बाजू से आवाजे आने लगती है की अब कितना इंतजार करोगे ..शादी तय कर लो..जैसे शादी के अलावा जिन्दगी का कोई हेतु ही नहीं है दूसरा..

क्यों ये सब दिखावा होने देते है हाम मुझे वो ही पता नहीं चलता.
आज का दिन है जब हम ये दिन का विरोध करके अपना आक्रोश जता सकते है...
लोग मुझे कहेते है की नीता तुम क्यों इतना कड़वा बोलती हो...
पर मुझसे ये आडंबर की दुनिया नहीं सही जाती है...
मै नहीं मना सकती जूठ मुठ के दिन, क्या करू??
अगर हम नारियाँ एक हो जाए तो किसी भी पुरुष में इतनी शक्ति नहीं की हमें परेशान कर सके..
और ये शुरुआत हर सास और बहु को करनी है...

5 comments:

anita agarwal said...

kitni mazedaar baat hai ki mei abhi aapsae pehli baar mulakat hui. pehli baar mei hi maine aapko mahila diwas ki badhai di aur khud hi kaha ki is diwas ka auchitya kya hai......
aur dekhiye aapke blog per mei hoon...pehli baat ayi hoon aur yahan wahi dekh rahi hoon...ki kya matlab hai is mahila diwas ka? kuch bhi to nahi....
kuch to badla hai ek mahila ke liyae..... ye to mannae padega...magar "diwas" ka kya auchitya.......mahila pehle jitni saksham ya aksham thi, utni aaj bhi hai.....mahila diwas to ek mazaak sa hi lagta hai mujhae.....
.....anita agarwal

ρяєєтι said...

Agree with Anieee Di,

Jo aapne kaha sat pratishat satya hai.. hame yaane hum mahilaao ko hi is ke liye uchit prayas kar, kadam uthane honge. hume khud apna wajud kaayam karna honga....

रश्मि प्रभा said...

mahila diwas kyun? kya koi parv hai, yaa hasya vishay?
naari vidhaata ki adbhut kriti hai,har sthiti me saksham hai,phir bhi kya hai uske paas???????bhay,hatasha,aansu?kya uski hatya band ho gai? agar uski sthiti swargik hoti to happy day kya happy year manate........kuch sashakt mahilayen kal bhi thi,aaj bhi hain,kal bhi hongi.......par samasyaayen jo kal thi,aaj bhi hain aur kal bhi hongi..

Jyotsna Pandey said...

बहुत खूब!
अच्छा व्यंग्य कर लेती हैं ..........
मेरी शुभकामनाएं .........

Jibon Das said...



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