Monday, April 25, 2011


आज तुम्हारे सारे ख़त पढ़े..
किसी मे लिखा था की तुम्हारे बीना मै जी नहीं पाऊँगी,
किसी मे लिखा था " तू कुछ सोच मत उलटा, मै कभी भी नहीं बदलूंगी.."
किसी मे लिखा था " मै तुम्हारी ही रहूँगी जिंदगी भर "
किसी मे लिखा था " अगर तुम मुझसे कभी दूर हुई तो जान से मार डालूंगी तुम्हें "
आज तुम मेरे बीना जी रही हों,
आज तुम बदल गई हों.,
आज तुम कही भी मुझे दिखाई भी नहीं दे रही हों,
और आज तुम ही मुझसे दूर हों गई हों,
अब तुम ही कहो क्या करूँ ये ख़त का ?
अगर मिटा देती हु तो तुम्हारा प्यार मुझे अब तो सिर्फ इसमें से ही मिलने वाला है..कैसे मिटाउ ?
और अगर नहीं मिटाती हु तो मेरी आंखे रोना बंध नहीं करती..
क्यों ऐसा रिश्ता बंधा जिसमे जब तक साथ थे तुम खुश थी,
पर आज साथ नहीं है तो भी तुम खुश हों...
चलो मै ही तय कर रही हु की प्यार का खोना बर्दाश्त नहीं होगा मुझसे..
भले रो रो के आखे चली जाये ..
तुम्हारी सखी..

नीता कोटेचा "नित्या"