Wednesday, October 27, 2010

मालतीबेन सरैया..

आज ८ मार्च जो महिला दिन के नाम से सब मनाते है..१५ दिनों से मालती को कितने फोन आ रहे थे की उनके प्रोग्राम में वो अतिथि -विशेष बनके जाए..पर मालती को ये दिन ही नहीं पसंद था. उसे गुस्सा आता था क्यों ये दिखावा..?
जब कोई पुरुष किसी महिला को कभी सम्मान देता ही नहीं तो भी ये दिन मनाने का ? और उनको सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात से था कि उस प्रोग्राम में पुरुष सदस्य भी होते थे..
पर आज जिनका फोन आया था उन्हें न कहना मुश्किल था.. क्योकि ये ही वो इंसान थे , जिन्होंने अपने पेपर में उनकी पहली कहानी छापी थी और तब से उसे लोगो ने पहचाना था..
फिर वो खुद की शर्तो पे ही वो जाने को तैयार हुई..मालती जानती थी की उसे कही न कही तो जाना ही पडेगा..नहीं तो ऐसे ही फोन आते रहेंगे..
और उसने "स्त्रीत्व संस्था " वालो को हाँ कह दी ..
मालती को पता था वहाँ बहुत बड़े बड़े महानुभाव आएंगे .."स्त्रीत्व सस्था " वालो को भी पता था की मालती सरैया मतलब आग उगलने वाली इंसान ..मालती को खुद को इस बात का अचरज था कि क्यों फिर भी लोग उसे पसंद करते थे.. पर उसने सोचा ठीक है चलो हमें तो अपना काम करना है और निकल जाना है.."स्त्रीत्व सस्था " वालो को भी पता था की अगर किसीको भी पता चल गया की मालती सरैया आने वाली है तो आधे लोग निकल जायेंगे,इसीलिए किसीको बताया नहीं गया था.
शाम हुई .प्रोग्राम का हॉल पूरा भरा हुआ था..ये प्रोग्राम टीवी में लाइव दिखाने वाले थे तो बड़े लोग भी ज्यादा आते थे..मालती सरैया की एंट्री सबसे आखरी में रहती थी.
आखिर प्रोग्राम की शुरुआत हो ही गई.. संचालक ने माइक अपने हाथ में ले के स्त्री शक्ति के बारे में बहुत सारी बाते की..फिर उन्होंने अलग अलग संस्था के प्रमुख को बुलाया..उन्होंने भी अपने प्रवचन दिए..नारियों को किस तरह से आगे बढ़ना चाहिए उस विषय पर बातें की..और नारियो की तारीफ़ करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी..
सब के प्रवचन के बाद संचालक वापस स्टेज पर आये और कहा. अब मै निमंत्रित करता हूँ उस इन्सान को जो एक एक स्त्रियों के दिल में राज करती है.. मै उन्हें आमत्रित करता हूँ की वो आज के दिन अपने विचार प्रगट करे..तो स्वागत है मालती सरैया जी का..
उनका नाम सुनते ही हॉल में बैठी सारी नारियो में से बहुत सी के चहेरे पर ख़ुशी आई और जो अपने पतिदेव के साथ आई थी उनके चहेरे का रंग जैसे उड़ सा गया..क्योकि उन्हें पता था की आज के विषय को देखते वो कैसे मर्दों की हालत करेगी..और उसमे उन्हें ही डांट पड़ेगी..ये ही तो है अपनी भारतीय नारी की मज़बूरी..कि पतिदेव कितना भी गलत कर रहे हो पर उनके खिलाफ वो एक शब्द नहीं बोलती..और न बोलने देती है..
लोगो के बीचो में कानाफूसी शुरू हो गई थी..कितने आदमियों को तो A.C हॉल में बैठे होने के बावजूद पसीना पोछना पडा..
मालती सरैया जैसे ही स्टेज पर आई पूरे हॉल में आते हुए आवाज जैसे थम सी गई . एकदम शांत हो गया पूरा वातावरण.बस उनके चप्पल की एडी की आवाज ही आ रही थी..पूरी श्वेत रंग की सारी में मेरून रंग की बोर्डर वाली साडी ..तना हुआ बदन ..कही से लगता नहीं था की वो ६० साल की महिला थी..
संचालक ने उनका स्वागत हार और श्रीफल से किया..और मालती सरैया को माइक देते हुए कहा की " अब आप अपने शब्दों का उपहार हमें देकर हमारे प्रोग्राम की शोभा बढ़ाइए..
मालती जी ने माइक हाथ में ले कर पूरे हॉल में नजर घुमाई और पुछा" बोलो किस किस को मेरे शब्दों का उपहार चाहिए और किस किस को नहीं " और फिर वो मुस्कराने लगे..
कही से कोई जवाब नहीं आया..
तो उन्होंने बोलना शुरू किया..
" आज महिला दिन, पर मुझे एक बात समझ नहीं आ रही की यहाँ पर बहुत सारे पुरुष वर्ग क्यों शामिल है..यहाँ जिसने प्रोग्राम रखा उन्हें भी मै पूछती हूँ की क्या महिलाओं को पुरुष के हाथो से सन्मान देना ठीक होगा ?"
ये था सब पुरुषो को पहला तमाचा..
" यहाँ पर ज्यादातर पुरुषो को ये लग रहा होगा कि मै यहाँ से उठ के चला जाऊ.. तो जिन्हें ऐसा महसूस हो रहा है वो ख़ुशी से जा सकता है.. पर सिर्फ वो ही लोग जा सकते है जो अपनी पत्नी पर हाथ उठाते हो या दिन रात उनका अपमान करते हो.." अब मालती जी वापस चुप हो गई..और इन्तजार करने लगी की कोई उठ के जाए..
और हॉल में बैठा पुरुष वर्ग सोच में पड़ गया की अगर गए तो यूं लगेगा की हम अपनी पत्नियों को मारते है या उनका अपमान करते है..और अगर नहीं गए तो मालती जी का अपमान सहना है..पर जाने से बेहतर उनको बैठना लगा..
दो मिनिट के इंतज़ार के बाद मालती जी ने वापस माइक उठाया और कहा" चलो लोगो को मेरे से अपमान करवाना शायद ज्यादा पसंद है.."
चलो ठीक है अब हम आज की बात शुरू करे.हम महिला दिन मानते क्यों है ? क्या हम कभी पुरुष दिन मानते है ? और यहाँ जितने पुरुष बैठे है उसमे से ऐसा कोई पुरुष न होगा जो अपनी पत्नी पर गुस्सा नहीं करता होगा..अपमान नहीं करता हो..पर कोई बाहर नहीं गया..और मुझे दुःख इस बात का है किसी पत्नी में भी ये ताकत नहीं थी की वो अपनी पति को कहे की आप बाहर जाओ..आज भी बहुत अच्छे घर के पुरुष महिलाओं पर हाथ उठाते है..और जो शायद ये कहते है की हम हाथ नहीं उठाते है तो पक्का वो शब्दों से उसे जरुर मारते होंगे..पर महिलाए कुछ नहीं कहती ,कारण माता पिता के संस्कार..या वापस जाए तो जाए कहा..?मायके में भी कहा जाता है की हमारे घर पहले ही भरे हुए है ,जैसे तैसे काट डालो ये जिन्दगी..
आप सबको शायद पता नहीं होगा पर आज भी १००% महिलाओं में से ९५% महिलाए बस जिन्दगी पूरी करती है..अगर कोई x-ray मशीन मिल जाये जिससे महिलाओ के मन की बात हम पढ़ सके तो २% महिलाए सन्मान पाती है और दूसरी ३% महिलाए झूठ बोलती है उन्हें सन्मान मिलता है,,और तो भी हम महिला दिन मनाते है..और आज भी मनाएंगे..और हां अगर मै जिन्दा रही तो अगले महिला दिन में मुझे कोई आमंत्रित मत करना..मुझे ये प्रोग्राम में आना बिलकुल पसंद नहीं है..क्योकि यहाँ बोल कर कोई मतलब तो है नहीं..चलो मै रज़ा लेती हूँ
अभी भी हॉल में शमशान सी शांति थी.. और मालती जी ने एक व्यंग भरी मुस्कान के साथ सब के सामने देखा.. तभी ही हॉल में से एक आदमी खडा होके बोला " क्या मै एक सवाल पूछ सकता हु ?"
माल्तीजी खड़ी रही और कहा" वैसे अभी तक मैंने किसी पुरुष को इतना हक नहीं दिया की मुझे कुछ पूछ सके..पर आज हमारा दिन है तो चलो आज आप पूछ लीजिये..पर इतना याद रखना सवाल जाने बिना ही मै कहती हूँ की मेरा जवाब आपको जला देगा फिर मत कहना की माल्तीजी ने ऐसा जवाब दिया..पूछिए.."
मेडम , अभी तक आपने शादी नहीं की उसका कारण क्या ?
क्या आपको कोई पसंद नहीं आया की किसीने आपको पसंद नहीं किया?"
हॉल में से धीमी हंसी की आवाज आई..
माल्तिजी ने हंस के जवाब दिया " भैया बात ये है की..पूरी दुनिया में मुझे ऐसा कोई आदमी ही नहीं मिला जो मेरे शरीर को छुए बिना मुझसे प्रेम करे..अगर तुम्हे कही मिल जाए तो ज़रा भेज देना मै आज भी तैयार हूँ शादी के लिये. "
वो पुरुष सर नीचे करके खडा रह गया माल्तीजी जवाब का इंतज़ार किये बिना चलने लगी लगे..पूरे हॉल में सिर्फ उनके चप्पल की एडी की आवाज सुनाई दे रही थी

7 comments:

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ρяєєтι said...

Gujrati ma waachwani wadhare maza padeli..! but nice effort, Keep it up... luvsssssss

anju choudhary..(anu) said...

नीता शब्द नहीं है मेरे पास तारीफ के लिए
मै भी लिखती हूँ ...पर तुम्हारी सोच बहुत ही उम्दा है
बहुत अच्छा और सटीक लिखा है आज कल के वातावरण पे
बहुत खूब .........

Neelima said...

sarthak n satik ... ab mai kitab se match kar rahi hu un guzrati words mai hindi words khoj kar kai bar parna chaha par nhi parh pai thi ..thnx isi tarah likhti raho n har bar mujhe bulana mat bhoolna ..... .
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lots of love for nari ki awaz

anita agarwal said...

nari bahut maine mei wakai bebas hai...achhi likhi hai..khaas kerke end bahut impressive ban pada hai...

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiya laga..... to tuk baaton ka asar gahra hota hai

Jibon Das said...



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