Saturday, March 9, 2013


ham tumse dur bhi nahi,
hum tumhare pas bhi nahi..
jiye to jiye kaise ye kah do hame
ki hum tumhare bhi nahi
aur hum kisi gairo ke bhi nahi
neeta.....k

Friday, January 11, 2013

मानसिक बलात्कार






दिल्ली रेप के बाद औरतो , बेटियों के लिए दु:ख  होता है की कब समाज सुधरेगा और कब सुधरेगी पुरुषो की सोच , हम कितनी बेटियों को यु ही मरते देखेंगे और बस चुपचाप देखते ही रहेंगे।।

द्रोपदी के जमाने से जो चल रहा है वो आज भी चालु है , तब जो दिखाया गया था की घर के देवर और जेठ भाभी की साड़ी खीचते है और तब श्री कृष्णा उनके चिर पुरने आते है , तो मुझे ये समाज नहीं अ रहा की क्या जब देवर और जेठ सारे खिचेंगे तब ही प्रभु आयेंगे।। बहार वालो के लिए नहीं आयेंगे।। ऐसा कोई कायदा होगा क्या प्रभु का ? 
ऐसा हो रहा है की अब हम सारी  औरतो को ये तय कर लेना चाहिए की बच्चे करने ही नहीं।। क्योकि जनम देने वाला भगवान् जब हमारी बेटियों की रक्षा नहीं कर सकता हम क्यों उनकी श्रुष्टि  सँभालने के लिए बच्चे करे , बेटी बचाओ के नारे लगाते है तो बेटियाँ  क्या इसी के लिए है ? 
                जब छोटी थी तब एक कहानी पढ़ी थी की एक आदमी को बहुत सारे  लोग पत्थर मार रहे थे , तो किसीने कहा की जिसने कभी कोई गलती न की हो वो पत्थर मारे, तब कोई नहीं आगे आ सका।। तो आज जब ये रेप के खिलाफ बहुत सारे पुरुष भी खड़े है तब हम ये कह सकते है न की  जो आदमीने कभी सोच में या मानसिकता में भी किसी बेटी ये स्त्री का बलात्कार ना किया हो वो ही इसका विरोध  में आगे आये।। कितने आयेंगे क्या पता?
 रास्ते पे चलते हुवे , बस में या ट्रेन में , मंदिरो की भीड़ में हमें बहुत सरे ऐसे मर्द मिल जाते है जो हमें इस तरह देखते है की हमें लगता है की हमारा नजरो से ही बलात्कार हो गया , खुद की पत्नी के साथ चलने वाला पति भी दुसरो की बीवियों को और बेटियों को देखते रहेता है , हम बलात्कार करना तो बांध नहीं कर पायेंगे पर कमसेकम पुरुष खुद ही ऐसा न कारे तो मानसिक  बलात्कार तो बंध  हो ही सकते है।।
                   बेटियों और औरतो को ये काम घर से ही शुरू करना है , हमारे ही आजुबाजु के आदमियों में से अगर कोई ये काम करता है तब हमें तुरंत उनको टोकना है , शायद आहिस्ता आहिस्ता सब में बदलाव आयेगा।।

नीता कोटेचा "नित्या"

Friday, September 14, 2012



उमीदो के शहर में जाना होता है जब जब  ,
बेबसी ,उदासी और आसू ओ के अलावा कुछ न मिला .
भरे बाज़ार में बिका मेरा प्यार ,
बदले में बदनामी के सिवा कुछ ना मिला।

नीता कोटेचा "नित्या 

Saturday, August 25, 2012

दोस्त एक बार तो मुड़ के देख,
आज भी बह रही है आख़े तेरी  याद में..
नीता कोटेचा

Thursday, July 19, 2012


पूरी जिंदगी कटी अकेले, जिनके इंतजार में दोस्तों
देखो आज वो ही आये है गुलदस्ते ले कर बीदा करने दोस्तों..

नीता कोटेचा


कारण था ही नही कुछ मेरे जीने का दोस्तों,
फिर क्यों इतना दुःख जता रहे हों मेरी मौत पे दोस्तों..

नीता कोटेचा


वो शोहरत , वो इज्जत तब मिली थी जब हम कुछ कर लिया करते थे,
अब आज वापस मिली जब हमने जगह कर दी दुनिया में दोस्तों ..
नीता कोटेचा

Wednesday, March 7, 2012

तुम्हारी दुआओं से भी अब मैं तुम्हें ना मिलूं
जा तू कितना भी धुंदी मैं तुम्हें ना मिलूं

बेकदर शख्स को मोहब्बत सौंपी मैंने
तू तड़प जाये मेरी मोहब्बत को और मैं ना मिलूं

तुम्हारी एक एक साँस पर अपना नाम लिखा था मैंने
तू इन्हें मिटाना चाहे तो भी अब ना मिटून मैं ...

तू पुकारे हाय, आ भी जाओ अब मेरी ज़िन्दगी में दोबारा
बस तभी मेरी सांसें ख़त्म हों ...और मैं ना मिलूं ....!!!

~नीता कोटेचा (Concept)
~कशिश खान (Translated in Urdu)

Tuesday, March 6, 2012

बरसो बाद जब मिले हम उनसे
तो कहने लगे तुम्हारा नाम भूल गये कसम से

हाँ ये वोही शख्स है जो कहते थे कभी
तुम्हे ना भूलेंगे आखरी साँस तक ,भूले चाहे रिश्ते सभी

ये माना के मेरे हाथ में अब उनका हाथ नहीं
पर ये क्योंकर हुआ के मेरी ओर देखने का भी सवाब (रीत ,कांसेप्ट ,रसम ) नहीं

मेरा दर्द , मेरा रंज -ओ -गम वोह क्या जाने अब
मेरे नाम के पन्ने किताब -ए -ज़िन्दगी से फार दिए है जब

ये हिज्र का खेल तो हमारे दरमियान हमेशा से रहा
अपने अपने मक़ाम पर कभी मैं नहीं ,कभी तू ना रहा

मैंने तुम्हें याद रखके किस्मत को मात दे दी ...
तुमने मुझे भूलाकर किस्मत को जीत दे दी ....!!!

~नीता कोटेचा (Write and Concept)
~कशिश खान (Translated in Urdu)

Thursday, February 2, 2012

रब कहता है तू मांगे तो मै दू,
मै कहती हु मर्जी तेरी..
नीता कोटेचा

Wednesday, January 18, 2012

बरसी मनाने आ ही जाओ
वापस दिन आ गया जुदा जोने वाला
नीता

Monday, December 5, 2011

इतनी मोहब्बत क्यों हम तुम से कर बैठे
की
इतनी बेरुखी पे भी हम दूर नहीं हों पा रहे तुमसे..

नीता कोटेचा.

Monday, November 21, 2011

बेवकुफों की तरह इंसानों के पास हम उम्मीद रखते है,
मर्ज़ी ना हों तो उपर वाला भी हमें कहा प्यार देता है...

नीता कोटेचा

Thursday, November 17, 2011

क्या करोगे ऐसी खूबसूरती का जिन्हें चाहने वाले हम ना होंगे,
क्या करोगे ऐसी जिंदगी का जहा साथ देने वाले हम ना होंगे..
मुड़ के लौट आओ वापस हमारे पास,
मुस्कराओगे कैसे गर हसाने वाले हम ना होंगे..
नीता कोटेचा..

Friday, July 29, 2011

नाराज़ होते है तो बुलाता कोई नहीं..
चले जाते है तो आवाज़ देता कोई नहीं..
जिंदगी के मायने कितने बदल गये है अब,
कभी हमारी एक आवाज़ को तरसते थे लोग ,
अब तो चुप रहते है तो पुकारता कोई नहीं..

नीता कोटेचा.

Thursday, July 28, 2011

ख़्वाब पर तो किसी का ना हक है ना काबू,
देखो हमने तुम्हें वही देखा और प्यार कर लिया

नीता कोटेचा
समंदर से कह दो कि अपनी लहरों को संभाल के रखे..

फिर शिकायत ना करे ,
क्योकि हम अपने आप में बहुत तुफ्फां छिपा रखे है

नीता कोटेचा

Monday, May 9, 2011

नेट की दुनिया

ये नेट की दुनिया बड़ी अजीब होती है..
पहले लोग कहते थे की जब किसी से अगले जन्म का लें ना देना हो बाकी तो ही एक दुसरे को मिलते है..
यहाँ हजारों लोग अपने बन चुके है
किस किससे अगले जन्म का नाता हम ढूंढे ये कोई बताए.

जब तुम मिले थे, लगता था की जैसे मेरी दुनिया प्यार से भरपूर हो गई..
बिना देखे तुम्हें, बिना जाने पहचाने मैंने तुमसे प्यार किया..
बेइंतिहा प्यार किया..

पर अब तुम मेरे जीवन में नहीं हो..
बस उब चुके मुझसे
अब कोई नए साथी की तलाश में तुम निकल पड़े ..
या नए साथी के मिलने पर ही मुझसे नाता तोड़ दिया..
ये तो लेना था ही नहीं
बस सिर्फ देना ही था..

मेरी भावनाओं का देना
मेरा दिल का देना
मेरा अश्रु ओ का देना
मेरे वक्त का देना..
और मेरी मुहब्बत का देना..

चलो शायद मैंने भी ऐसा ही कुछ किया होगा गए जन्म में तुम्हारे साथ..
पर एक बात पूछ लू..अब तो हिसाब चुकता हो गया ना..
क्या अगले जन्म में मेरे दोस्त बनोगे तुम ?

नीता कोटेचा

Sunday, May 8, 2011

चलो आज की नींद भी उनके नाम करते है,

ख़्वाब मे तो वैसे भी वो कहा करीब होते है...

नीता कोटेचा

Saturday, May 7, 2011

मुझे माफ़ कर देना मम्मी



मै कुछ जोर से बोल दी थी तुम्हें
और तुम रो पड़ी थी.

पर तुम रसोई में कम करते करते रो रही थी ,
मुझे पता भी चलने नहीं दीया था..

और मै अचानक पानी पिने रसोई में आई,
तो देखा की तेरी आँखों में आँसू बहे जा रहे थे..,

मैंने पूछा मम्मी क्या हुवा ? क्यों रो रही हों ?
तो तुमने कहा बेटा अगर मेरा बच्चा मुझे जोर से कुछ कहे तो मुझसे कैसे सहा जाएगा.

मुझे बहुत दुःख हुवा की मैंने मेरी मा का दिल दुभाया..
मै उसके गले लग गई और मैंने कहा
"मा, तो मुझे डाट लेना था ,क्यों अकेले अकेले रो रही हों ?

तो मा ने कहा "बेटा अगर मै तुम्हें जोर से डाटूंगी तो तुम्हें भी दुःख होता ना.
वो बात को याद करके आज भी रो देती हु..

मुझे माफ़ कर देना मम्मी.

मै कितनी खुशनसीब हु की तुम आज भी मेरे पास हों और मेरे साथ हों..