इस तरह खामोश रह कर बिताई है जिन्दगी मैंने.. की मेरी धडकनों को भी पता नहीं, दिल रो रहा है..
नीता कोटेचा
ख्यालो में कहा वो तो धड़कन में है.. एक एक सास में जैसे उनकी खुशबु है..
नीता कोटेचा..
शिकायत करनी न आई तो लोगो ने समजा दर्द नहीं है.. और आसु में हम खुद को डुबोते चले गये.. ना उन्हें पता चला की हम तड़पते है उनके लिए ... और naa हमने बताना जरुरी समजा.. क्यों कुछ बोलके बताये की ,कितना प्यार है हमें तुमसे.. हमारे जनाजे पे आके देख लेना.. वहा भी तुम्हें हमारे प्यार का अहेसास मिल ही जायेगा..
मैंने एक बार माँ से कहा :माँ मुझे अपनी गोद में सुला लो.. मै थक गई यहाँ की मतलबी दुनिया से और मतलबी लोगो से.." तो माँ ने कहा"बेटा, ये तो वो लोग है जो जिन्दगी जीना सिखाते है.. मै कैसे तुम्हें उनसे दूर रखु..तुम फिर कभी लड़ ना पोगी.." तो मैंने कहा "माँ मुझे नहीं लड़ना इन लोगो से जो मेरे नहीं है पर मेरे होने का अहेसास जताते है.." तो माँ ने कहा" ये अहेसास ही काफी है, यहाँ तो लोगो को मतलबी लोग भी नहीं मीलते.. तुम जियो इन्ही के बिचमे.. तब ही तुम सिख पोगी दुनिया में जीना.." मै नाराज़ हो के चल रही थी तब माँ ने कहा.. "जाओ मत दो पल सो जाओ मेरी गोद में..इससे तुमसे ज्यादा मुझे सुकून मिलेगा..मै मतलबी नहीं ..मै तो एक ऐसी इन्सान हु तुम्हारी जिन्दगी की जो हर बार मुश्किलों में सर पे हाथ रखकर मुश्किलों से लड़ना सिखायेगी.."
और माँ देखो ,आज मुझे सब मतलबी ओ के बिचमे भी अपनापन ढूंढना आ गया..
नीता कोटेचा.
Saturday, March 7, 2009
कितना अजीब लगता है मुझे तो ये शब्द ही महिला दिवस.. साल में एक दिन मनाओ और उसमे भी सभी महिलाए खुश.. जैसे उनमे तो अक्कल ही नहीं है न... आज भी उनको सुनना पड़ता है की कमाने की लालच में तुमने अपना स्त्रीत्व गुमा दिया है .. पहेले से प्रथा चली आती थी की पुरुष घर के बहार जा कर कमाता था और नारी घर को संभालती थी.. पहेले जब कोई रिश्ता आता तो पहेले पूछा जाता था की आपके दादा कौन थे ..आपके मामा कौन है...अभी तो शादी के लिए रिश्ते आते है तो पूछा जाता है की आपकी बेटी कौन सी कंपनी में काम करती है कितना पगार है .. ये है सुधरा हुवा समाज .. अरे क्यों मनाते है ये दिन.. जब की आज भी भाई के ..या पापा के या फिर पति के मुड के ऊपर स्त्री ओ का दिन अच्छा जायेगा या बुरा जायेगा ये तय होता है... जैसे नारी पहेले gulaam थी उतनी ही आज भी है.. आज भी टीवी में बालिका बधू और लाडो जैसी सीरियल दिखाते है मतलब की कही ऐसा हो रहा है वो सही है..और वो ही सोच के बुरा लगता hai .. एक बेटी जब २१ सल् की होती है तो आज भी सब बाजू से आवाजे आने लगती है की अब कितना इंतजार करोगे ..शादी तय कर लो..जैसे शादी के अलावा जिन्दगी का कोई हेतु ही नहीं है दूसरा..
क्यों ये सब दिखावा होने देते है हाम मुझे वो ही पता नहीं चलता. आज का दिन है जब हम ये दिन का विरोध करके अपना आक्रोश जता सकते है... लोग मुझे कहेते है की नीता तुम क्यों इतना कड़वा बोलती हो... पर मुझसे ये आडंबर की दुनिया नहीं सही जाती है... मै नहीं मना सकती जूठ मुठ के दिन, क्या करू?? अगर हम नारियाँ एक हो जाए तो किसी भी पुरुष में इतनी शक्ति नहीं की हमें परेशान कर सके.. और ये शुरुआत हर सास और बहु को करनी है...
Tuesday, March 3, 2009
मुजमे मै समाया हुवा हु , पर खुद को ही कभी मिलता नहीं मै.. यादो की दस्तक और इंतजार की दस्तक , उसी में मै ढूंढ़ता हु खुद को ...
बचपन की वो कड़वी यादे ..लेकर बड़े हुवे... तो लगता था, कि अपना होगा घर.. और अपने होंगे बच्चे... और हम जियेंगे अपनी तरह.. ना किसीकी डाट सुनने कि ..न कभी फटकार सुनने कि.. अब तो मै जियूंगी अपनी तरह... पूरा आकाश मेरा और पूरी धरती मेरी... पर जैसे जैसे बचपन बिछड़ता गया. पता चला कि वो कड़वी यादे कितनी मीठी थी...
अबक्याकहूएखुदाऐसेलोगोकेलिए.. परहमतोतेरेसच्चेबन्देहै... तोयेहीदुआकरतेहै की कैसाभीहोवो.. पर उनसबकोखुशरखनाजोतुम्हेंयादकरतेहै..
नीताकोटेचा..
Sunday, February 15, 2009
दिल में हो सुकून तो दिन में तारे लगते है.. और जो हो बेचेनी तो अपने भी पराये लगते है... खुद ही खुद की छबी देखके , खुद को भी पहेचानते नहीं हम.. क्योकि जब खुदा हो रूठा तो चलती सास भी भारी लगती है..
नीता कोटेचा
जब से तुम्हें दिल में बसाया हमने , हसना भूल गये और रोना भी भूल गये..
दुनिया ने इस तरह से सताया की तुम्हें भूलना भूल गये..
पल पल उन्होंने दिए ताने तुम्हारे नाम से , की तुम एक पल दूर न हो सके मुझसे..
दूर हो गये हो हर पल के लिए मुझसे.. पर यु दिल में बसे हो जैसे एक ,
चुभता हुवा नासूर जो मीठा लगता हो..
नीता कोटेचा
प्रेम मौन है ..अगर हल्ला हो तो वो प्रेम नही, शायद है दिखावा..
प्रेम लेना नही ..प्रेम देना है..अगर उसमे उम्मीद कि,तो ज्यादा टिकता नहीं ...
प्रेम में भूल जाना है दुनिया को..बस सिर्फ प्रेम करना है एक दूजे को..
गलती देखनी नहीं है दूजे की..ये प्रेम नहीं है पर गलतिया दिखती ही नहीं दूजे कि, इसे ही सच्चा प्रेम कहेते है (मेरे विचारों से..)
अगर मै आत्मा हु तो मै रोता नहीं हु .. और अगर मै अभी भी शरीर हु, तो हा मै रोता हु.. बहार से भी और अन्दर से भी... और वो रोना कभी भी बंध नहीं होगा.. खुद तलाशिये खुद में की हम क्या है... शरीर या सिर्फ आत्मा. ...
मुझे शक्ति दे हे प्रभु की मै अपने आजू बाजु की बुराइयों को सह सकू.. मिटाना तो मेरी बस की बात नहीं.. तो अब एक ही रास्ता बचा है की मै उसमे ही जीना सिख लू.. पर क्या ये मेरा सही स्वाभाव है... तो क्यों देते है हम सब को लालच और लाच ... क्यों हम ही गंदकी फैलाते है और कहेते है अपने देश में तो कुछ है ही नहीं... हम इतने ख़राब क्यों है की अपनी ही धरती को हम पहेले गन्दा भी करते है और फिर गाली भी...देते है वाह रे इन्सान तुम्हें क्या कहू मै..
यु ही दिल के साथ गुफ्तगू में रात कहा बीत गई पता न चला .. हम ढूंढ़ते ही रह गये उनकों, और उन्हें पता न चला..
कितना इंतजार किया उनकी गली में खड़े हो कर.. वो पास से गुजर गये और हमारा उन्हें पता ही न चला.
वो कहेते है की हमें उनकी याद न आती है कभी.. पर उनकी याद में हम रोज मरे ,और उनको ये मालूम भी न पडा.
चलो अब तो शिकायत ही करनी छोड़ दी है .. क्योकि हम महोब्बत करते है उनको ,ये ही उनको पता न चला..
नीता कोटेचा.
Sunday, January 25, 2009
माँ के पल्लू में जो शुकुन मिलता है उसका अनुभव क्या होता है ..वो वो बच्चा ही बता सकता है.. और माँ के पल्लू को तार तार होने से बचाने में जो शुकून मिलता है वो अनुभव वो जवानो से पूछो जो ये भारत माता को संभालते है...वो पल्लू पे किसी बुरे आदमी का पैर न पड़े ..वो पल्लू में कही किसी अपने ही बेटे के खून का धब्बा न लगे ये सब बातो का ध्यान वो जवान करते है...बहोत लोगो के मुह से सूना है की कहा अब वो सोने की चिड़िया और कहा अब वो भगतसिंग जैसे जवान...मुझे बहोत दुःख होता है ये सुनकर की लोगो को सिर्फ बाते करनी आती है...२ आतंक वादी ओ के लिए क्यों कोई सादा इन्सान न गया??...क्यों जवान को ही बुलाना पडा था...हम अपने बच्चो को रास्ता पार करने नहीं देते अकेले..वो माँ के बारे में सोचो जो अपने बच्चो को हसी ख़ुशी सरहद पे भेजती है..की जा बेटा मर जाना पर भारत माता की लाज रखना...लोग कहेते है की सबसे बुरा भारत देश है..पर मै जब लोगो से बात करती हु तो पता चलता है की कितनी परेशानी होती है बाहारगाव के देशो से... माना बुराईया अपने देश में है..पर सब लोग तो अच्छे नहीं ही होंगे... अपने देश के बारे में बुराईया करने से पहेले एक बार नहीं सौ बार सोचो. फिर ही हमें हक्क है कुछ बोलनेका .
आज अचानक अपनी यादो की गली से गुजरना हुवा था.. पर देखा तो शहर की तरह उसके रस्ते भी बहोत बदल गये थे... अपनी यादो का तो कोई ठिकाना ही नहीं था.. और न तुम्हारा.. बस मै तो वहा अकेली थी जिसे मै पहेचानती थी.. फिर मैंने सोचा की वापस खो जाऊ ये गलियों में. इससे अच्छा है की रास्ता ही बदल लू... और मैंने रास्ता बदल लिया .. एक टीस जरुर है, पर, उतनी नहीं जीतनी तुम पास होते और मेरे न होते ये देखने से होती...
यु ही मुस्कराते हुवे जब जनाज़ा उठाया तुमने मेरा.. तो मूह फेर के थोडा एक नज़र भर देखा लिया तुम्हें... तुम आज भी उतने ही खुबसूरत लग रहे थे. जब मुझे प्यार करते वक्त मुस्कराते थे..
नीता कोटेचा
Monday, January 12, 2009
एक दोस्त ने msg भेजा..
जिंदगी की किताब के कुछ पन्ने होते हैं..
कुछ अपने कुछ बेगाने होते हैं. प्यार से सवर जाती है जिंदगी..
बस प्यार से रिश्ते निभाने होते है..
... मैंने जवाब दिया.
ज़िन्दगी अगर खुली किताब हो तो मजा आता है.. सब सिर्फ अपने, ना कोई पराया हो..तो मजा आता है... प्यार से नहीं दिल से निभानी होती है जिन्दगी और प्यार से नहीं, भरोसे से ही नभ जाते है रिश्ते नीता
और जिन्दगी हमें चाहे महोब्बत न करे.. हमने तो मौत को भी दिल देके रखा है..
नीता कोटेचा
Monday, January 5, 2009
सबको गले लगा करा हम जिए है। सबको अपना बनाके हम जिए है । पता नहीं तकदीर क्यों मूह मोड लेती है। अचानक की सब अपने होते है फिर भी हम अकेले जिए है॥ नीता कोटेचा
डर लगता है कही कोई दोस्त दूर ना हो जाए वापस. और भरी दुनिया में हम अकेले न हो जाए वापस. .ये दुनिया बड़ी है जालिम ए दोस्त .. इसीलिए सोचती हु की, जो नजदीक है वो भी दूर न हो जाए वापस -- नीता कोटेचा
Thursday, August 28, 2008
खोखले
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दुनिया बदल जाती है, दोस्त बदल जाते है
जब ख़ुद की किस्मत बिगड़ी हो, तो सब लोग बदल जाते है॥
अरे डरो मत दोस्तों,सब बदल गया तो क्या हुवा ॥
पता तो चला की रिश्ते कितने खोखले होते है।
नीता कोटेचा
चल देते है
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कौन अपना ,कौन पराया, पता चल जता है,
जब हम होते है परेशांन
क्योकि तब ही वो लोग मुह मोडके चल देते है
नीता कोटेचा
Tuesday, August 12, 2008
किसीको प्यार करके भूलाना हमें नही आता, किसीसे दोस्ती करके तोड़ना हमें नही आता, या करीब मत आना या दूर मत जाना क्योकि दोस्त का दूर जाना ये बर्दास्त करना ये दिल को नही आता ।
नीता कोटेचा १२-०८-2008
Wednesday, May 28, 2008
बदनाम ...................... इसतरहसेदुनियानेसतायाहैमुजे की अपनाबनाकेबहोतरुलायाहैमुजे क्याकरेकिस्मतहीऐसीपाई हैकी बेगानोनेनहीपर अपनोंनेहीबदनामकियाहैमुजे
अनजाना दोस्त .................... एक अनजाना दोस्त अपना लगाने लगा ,, जैसे जीने का एक बहाना लगने लगा, करीब आए हो तो दूर मत होना अब, अब तो जैसे दिल का एक कोना तुम्हारा होने लगा.